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Sunday, November 7, 2010

ब्रजेश कुमार पांडेय की दो कविताएं



जन्म -बक्सर (बिहार)
कथादेशदेशजपरिकथा सहित पत्र -पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित।  कविताएँ लीलाधर मंडलोई द्वारा सम्पादित किताब "कविता का समय" में भी। अचला शर्मा और सुधीश पचौरी की किताब नए जनसंचार माध्यम और हिंदी में बीबीसी के कार्यक्रमों पर समीक्षा प्रकाशित ।
संपर्क - बर्फ फक्ट्री के पास ,पांडे पट्टी ,बक्सर,            
बिहार-802103.  Mobile: [09770556046]


इन सबके बीच 

अरे पगली मैना 
किस-किस जतन से 
तिनका -तिनका सुख जोड़ा 
लेकिन कभी यह सोचा 
कि जिस कूप में 
बनाया घोसला तुमने
एक छांह देखकर 
देखकर एकाकी
और यह भी कि
लहरा रहा है
इंटों के बीच इंच भर जगह में 
जड़ जमाए यह झुरमुट 

लेकिन तुम्हारी मुग्धता ने कभी यह सोचने का भी 
समय नहीं दिया
कि कभी भी खिसक सकता है आधार
कि तुम हो जाओगी फुर्र
और तुम्हारे अंडे डुप्प से ...

इन सबके बीच 
समय की अंगड़ाई लेने जितना भी 
मिल गया समय तो 
चूजे भरने को होंगे उड़ान 
टकराकर दीवार से 
डुप्प से ...

यदि घड़ी के सेकंडों के बीच की 
बढ़ भी जाए दूरी 
तो भी नई पांख लिए परिंदे 
कुँए के पानी में दिखते आकाश में 
नापेंगे ऊंचाई 
डुप्प से .

मै नहीं मिलूँगा 

जब मै पूछता हूँ 
किसी से उसका पता 
वह कह उठता है 
पता नही 
कब कहाँ रहूँ 

फिर 
लिख लीजिए 
यह नंबर 
नाइन फ़ोर थ्री एट...
हमेशा मिलूँगा इसी पर 

मुझसे लोग कहते है 
दे दीजिए कोई नंबर 
मै कहता हूँ 
लिख लीजिए पता 
ग्राम-पांडेपुर ,पोस्ट -निमेज 
हमेशा मिलूँगा 
इसी पते पर 

अभी तक मुझसे मिलने 
कोई नहीं आया
मेरे गाँव
उन्हें आशंका है न
कि मै नहीं मिलूँगा 



हस्ताक्षर: Bimlesh/Anhad