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Friday, January 14, 2011

नील कमल की एक अद्भुद कविता

नील कमल समय के संजीदा कवि हैं । संपर्कः 09433123379

एक बार की बात
(बच्चों के लिये एक कविता)

एक बार की बात सुनो तुम
चमकीली वह रात सुनो तुम । 
अपने आंगन में   उतरी थी
तारों की बारात  सुनो तुम ॥

गोलू  आओ,   बेबू  आओ
निक्कू, चीनू तुम भी आओ ।
जब हम तुम जैसे बच्चे थे
मन के खरे और  सच्चे थे ।

क़लम डुबो कर लिखते जिसमें
शीशे की  दावात सुनो  तुम ॥

नीले स्याही का  जादू   जब
सिर चढ़ कर बोला करता था ।
कोरे पन्नों पर   सपनों  का
पंछी पर  तोला  करता  था ।

हर उड़ान में  शामिल  होती
अपने मन की बात सुनो तुम ॥

आम,बेर, इमली, जामुन  के
पेड़ हमारे बड़े  निकट   थे ।
गूलर, नीम और  बरगद के
पेड़ साथ ही खड़े विकट  थे ।

महुआ झरते  फूल  सुनहरे
पीपल झरते  पात सुनो तुम ॥

खेतों में पकते  अनाज  की
खुशबू से  मन भर जाता था ।
ढिबरी सांझ ढले जब  जलती
घन से घन तम डर जाता था ।

धुले-धुले से मन सबके  थे
नहीं कहीं थी घात सुनो तुम ॥

लिपे-पुते घर की देहरी पर
खुशियों का  बारहमासा था ।
राग रसोई का  मौसम तो
अपने घर अच्छा खासा था ।

कितने मन से हम खाते थे
तरकारी  और भात सुनो तुम ॥

विद्यालय था तीन कोस पर
कोस अढ़ाई  था   बाज़ार ।
दूरी बीच नहीं आती  थी 
चलते थे सब  कारोबार  ।

अपने आंगन  से  गंगातट
किलोमीटर सात सुनो तुम ॥

जब तुम कुछ लिख-पढ़ जाओगे
सचमुच आगे बढ़     जाओगे  ।
बचपन  अपना  याद करोगे 
घर आंगन  आबाद  करोगे  ।
मीठी यादों ने खिड़की   में
रक्खे होंगे  कान सुनो तुम ॥

हस्ताक्षर: Bimlesh/Anhad

3 comments:

  1. बालगीत अच्छा लगा। आभार। बच्चों को शायद कुछ लम्बा लगे।

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  2. बहुत शानदार कविता। रिदम और कथ्य दोनों में ही लाजवाब... बधाई...

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