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लोचन कोना

लोचन कोना

आजकल हमारे चारो तरफ संस्कृति के नाम पर सांप्रदायिक तांडव बहुत ही चिंताजनक है। संस्कृति कर्मियों की जमात के हाथ में कुछ होता नहीं है। लेकिन क्या संस्कृति कर्मियों की कोई जमात...

रोशनी वाला आदमी–विजयशंकर चतुर्वेदी

रोशनी वाला आदमी–विजयशंकर चतुर्वेदी

विजयशंकर चतुर्वेदी ‘रोशनी वाला आदमी’ विजयशंकर चतुर्वेदी की ऐसी कहानी है जो सत्ता, संस्थान और बौद्धिक विवेक के बीच बढ़ते तनाव को प्रोफ़ेसर नीलांश वर्मा के चरित्र के माध्यम से सामने लाती...

पल्लवी जयराम की सात कविताएँ

पल्लवी जयराम की सात कविताएँ

पल्लवी जयराम युवा कवि पल्लवी जयराम की ये कविताएँ समकालीन जीवन के अंतर्विरोधों, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक-सांस्कृतिक सत्ता संरचनाओं की गहरी पड़ताल करती हैं। प्रेम, परीक्षा, परिवर्तन, देवत्व, मातृत्व और आज़ादी जैसे...

ध्यान सिंह की कविताएँ

ध्यान सिंह की कविताएँ

ध्यान सिंह ध्यान सिंह जी का जन्म 2 मार्च, 1939 ई को जम्मू के घरोटा नामक गाँव में हुआ। वे डोगरी के वरिष्ठ कवि-गद्यकार हैं। विभिन्न विधाओं में इनकी लगभग 75 किताबें...

संगीता घिल्डियाल की कविताएँ

संगीता घिल्डियाल की कविताएँ

संगीता घिल्डियाल अनहद कोलकाता पर पढ़ते हैं आज संगीता घिल्डियाल की कविताएँ । इन कविताओं में संगीता घिल्डियाल प्रकृति, प्रेम, देह, स्मृति और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों को एक विशिष्ट वन-परिवेश में...

भोर होने से पहले : राकेश कुमार सिंह

भोर होने से पहले : राकेश कुमार सिंह

वरिष्ठ एवं चर्चित कथाकार राकेश कुमार सिंह की यह कहानी पलामू के जंगल-पठार, आदिवासी जीवन और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की पृष्ठभूमि में आधुनिक चिकित्सा, अंधविश्वास और मानवीय संवेदना के जटिल द्वंद्व को...

लोचन कोना – प्रफुल्ल कोलख्यान

लोचन कोना – प्रफुल्ल कोलख्यान

लोचन कोना (अनहद कोलकाता के साप्ताहिक कॉलम — लोचन कोना — की बुनियादी टिप्पणी) लोचन जलु रह लोचन कोना, जैसे परम कृपण कर सोना। यह तुलसीदास के रामचरितमानस के फुलवारी प्रसंग से...

पहाड़ी लोक परंपरा को आधुनिकता से जोड़ता हुआ कविता संग्रह – देवेश पथ सरिया

पहाड़ी लोक परंपरा को आधुनिकता से जोड़ता हुआ कविता संग्रह – देवेश पथ सरिया

पहाड़ी लोक परंपरा को आधुनिकता से जोड़ता हुआ कविता संग्रह देवेश पथ सारिया  उत्तराखंड के वरिष्ठ कवि भूपेंद्र बिष्ट का कविता संग्रह ‘गोठ में बाघ’ पढ़ा। भूपेंद्र बिष्ट पहाड़ के आदमी हैं...

अनिल गंगल की नई कविताएँ

अनिल गंगल की नई कविताएँ

अनिल गंगल इन कविताओं की प्रमुख विशेषता यह है कि कवि बड़े प्रश्नों को घोषणात्मक वैचारिकता के बजाय रोज़मर्रा के दृश्य, वस्तु और अनुभवों से जोड़कर सामने लाता है; उसकी भाषा सहज,...

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