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नवीन रांगियाल की कविताएँ

नवीन रांगियाल की कविताएँ

नवीन रांगियाल नवीन रांगियाल की इन कविताओं में प्रेम, विरह, स्मृति, अकेलेपन और मृत्यु के अनुभवों से गुजरते हुए जीवन की उन महीन संवेदनाओं को अभिव्यक्ति मिली है, जो अक्सर हमारी रोजमर्रा...

लोचन कोना-7 — प्रफुल्ल कोलख्यान

लोचन कोना-7 — प्रफुल्ल कोलख्यान

लोचन कोना-7 — प्रफुल्ल कोलख्यान प्रेमचंद के विचार से — साहित्य अपने सर्वोत्तम रूप में जीवन की आलोचना है। हमारी कसौटी पर वही साहित्य खरा उतरेगा, जिसमें उच्च चिंतन हो, स्वाधीनता का...

मृत्युंजय प्रभाकर की कविताएँ

मृत्युंजय प्रभाकर की कविताएँ

मृत्युंजय प्रभाकर मृत्युंजय प्रभाकर की ये कविताएँ वर्तमान समाज, राजनीति और मनुष्य के अंतर्विरोधों की गहरी पड़ताल करती हैं। उनकी कविता में एक ओर कवि की सामाजिक प्रतिबद्धता, मनुष्यता के प्रति गहरी...

अखंड भारत से खंडित समाज तक : वर्णव्यवस्था की भूमिका

अखंड भारत से खंडित समाज तक : वर्णव्यवस्था की भूमिका

अखंड भारत से खंडित समाज तक : वर्णव्यवस्था की भूमिका — नन्दलाल भारती नन्दलाल भारती सभ्यता का गौरव और समाज का अंतर्विरोध भारत की सभ्यता का इतिहास ज्ञान, दर्शन, श्रम, कला, कृषि,...

ब्रॉउन कुमार – सत्यनारायण पटेल

ब्रॉउन कुमार – सत्यनारायण पटेल

सत्यनारायण पटेल सत्यनारायण पटेल की कहानी ‘ब्रॉउन कुमार’ समकालीन भारतीय समाज, राजनीति और व्यवस्था के अंतर्विरोधों को तीखे व्यंग्य के माध्यम से उजागर करती है। ब्रॉउन कुमार उर्फ़ शिव कुमार एक ऐसा...

मौत​ : देवर्षि सारोगी

मौत​ : देवर्षि सारोगी

​देबर्षि सारगी देवर्षि सारोगी एक विशिष्ट बंगाली कथाकार और उपन्यासकार हैं, जो अपनी मौलिक आवाज़ और कल्पनाशील साहित्यिक दृष्टि के लिए जाने जाते हैं। उनकी कृतियाँ रोजमर्रा की वास्तविकता को सपनों, अवचेतन,...

केशव शरण की कविताएँ

केशव शरण की कविताएँ

केशव शरण केशव शरण की इन कविताओं में जीवन के साधारण अनुभवों, प्रकृति की सहज लय, प्रेम की आत्मीयता और मनुष्य की मुक्ति-कामना से निर्मित एक संवेदनशील काव्यलोक दिखाई देता है। उनकी...

सत्य प्रकाश ध्रुव की कविताएँ

सत्य प्रकाश ध्रुव की कविताएँ

सत्य प्रकाश ध्रुव सत्य प्रकाश ध्रुव की कविताओं में स्मृति, प्रेम, विरह, घर और लौटने की आकांक्षा जैसे जीवन के आत्मीय अनुभव सहज संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त हुए हैं। उनकी कविताएँ निजी...

लोचन कोना – 6 – प्रफुल्ल कोलख्यान

लोचन कोना – 6 – प्रफुल्ल कोलख्यान

लोचन कोना - 6 - प्रफुल्ल कोलख्यान कविता सभ्यता की निर्दलीय उम्मीदवार है और सच! शुरू के पहले एक अस्वीकरण : मैंने आलोचना का कारोबार समेट लिया है और जो पसार रहा...

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